ईरान सरकार ईरानी लोगों के अधिकारों पर लगातार हमला कर रही है ।
एक ईरानी अदालत ने अमीर कबीर विश्वविद्यालय के तीन छात्रों को 30 महीने की जेल की सजा को सही ठहराया है । श्री मजीद तावक्कोली, अहमद गासाबान और एहसान मंसूरी को इस्लाम का अपमान करने वाली सामग्री छापने के लिए अभियुक्त करार दिया गया है, हालांकि उनका कहना है कि ये मनगढ़ंत आरोप हैं । इन तीनों को 2007 के बसंत में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे एविन जेल में बंद हैं । उनके परिवारों का दावा है कि उन्हें कठोर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक यातनाएं दी जाती हैं ।
ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हाल ही में 3 अन्य कैदी ईरानी छात्रों को यातना दिये जाने के आरोपों की जांच की मांग की थी । श्री बहरूज़ करीमीज़ादेह, पेमान पिरान और अली कंतूरी को दिसंबर, 2007 में गिरफ्तार किया गया था और हिरासत में रखा गया था । ये सभी एक छात्र संगठन के सदस्य हैं, जो असमानता तथा अन्याय का शांतिपूर्ण प्रतिरोध करने की वकालत करता है । समझा जाता है कि श्री पिरान और श्री करमीज़ादेह को एविन जेल में एकाकी कोठरी में रखा गया है । श्री कंतूरी, जिन्हें कराज शहर की गेज़ेल हिसार जेल में रखा गया है, की कथित तौर पर पूछताछ के दौरान पसलियां तोड़ दी गई थीं, जब उन्होंने झूठे आरोपों को स्वीकार करते हुए फिल्माए जाने से इन्कार कर दिया ।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को भी सरकारी अधिकारियों के अत्याचारों का शिकार होना पड़ रहा है । सुश्री परवीन अर्दालान, जिन्हें हाल ही में महिलाओं की समानता के समर्थन में किये गए उनके कार्य के लिए स्वीडेन का ओलोफ पाल्मे पुरस्कार दिया गया था, पर सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया गया है । दो कुर्द ईरानी महिला अधिकार कार्यकर्ता, सुश्री रौनक सफरज़ादेह और हाना आब्दी पांच महीने बाद भी जेल में बंद हैं और हाल ही में उन पर देश की सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया था । तीन अन्य महिलाओं- सुश्री मारज़ीह मोर्ताज़ी, नसरीन अफज़ाली और नाहिद जाफरी को समान अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण रैली में भाग लेने के बाद कोड़े मारने और जेल की सजा सुनाई गई है, जो अभी स्थगित है । अगर उन्हें दो वर्षों के भीतर किसी अन्य अपराध का दोषी पाया गया तो उन्हें ये सजाएं दी जाएंगी ।
अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से हाल ही में पूछा गया था कि उन्होंने ईरान जैसी निरंकुश सरकारों के नेताओं से बिना पूर्व शर्तों के मिलने से इन्कार क्यों कर दिया था । उनके जवाब में उन ईरानियों की हालत का हवाला दिया गया, जिन्हें मानवाधिकारों को प्रोत्साहन देने के लिए तकलीफें झेलनी पड़ती हैं ।
"किसी अत्याचारी को, जो अपने लोगों को उनके राजनीतिक विश्वासों के कारण जेल में डाल देता है, गले लगाने से क्या नुकसान होता है ? नुकसान यह होता है कि इससे गलत संदेश जाता है । इससे उन लोगों को निराशाजनक संदेश जाएगा, जो यह सोचते हैं कि क्या अमेरिका कैदियों की स्वतंत्रता के लिए काम करता रहेगा । इससे उन लोगों की स्थिति ऊंची होगी, जिन्होंने मानवाधिकारों और मानव गरिमा का दमन किया है ।"
राष्ट्रपति बुश ने कहा, "ईरान के नेता ईरानी लोगों को उनके सच्चे अधिकारों से दूर रख रहे हैं ।
अमेरिका ईरान के नागरिकों की स्वंतत्रता से रहने की आकांक्षाओं का प्रबल समर्थन करता है ।