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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है । एक बार फिर इस रिपोर्ट में ईरान की सरकार दुनिया में आतंकवाद के सक्रिय सहयोगी देशों की सूची में सबसे ऊपर है ।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ऑफिस फॉर काउंटर टेररिज्म (आतंकवाद-रोधी विभाग) के समन्वयक डेल डेली ने आतंकवाद की कई तरह की गतिविधियों में ईरान सरकार की भूमिका पर टिप्पणी की है ।
उन्होंने कहा- ईरान फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठनों, लेबनानी हिज़्बुल्ला, इराक स्थित उग्रवादियों और अफगानिस्तान में तालिबान लड़ाकुओं को सहायता दे रहा है । इराक में स्थायित्व के प्रति वचनबद्धता जाहिर करने के बावजूद ईरान के अधिकारी अभी भी हथियार, प्रशिक्षण, पैसे और दिशा-निर्देश के जरिये कुछ इराकी उग्रवादी संगठनों को अभी भी हिंसा के लिए प्रोत्साहन दे रहा है । ये इराकी संगठन गठबंधन व इराकी फौजों एवं इराकी जनता को निशाना बना रहे हैं ।
श्री डेली ने कहा कि ईरान आतंकवाद को सहायता देने वाले अपने दूसरे सहयोगी देश के साथ मिलकर लेबनान की निर्वाचित सरकार को कमजोर करने की कोशिस में भी लगा हुआ है ।
ईरान में अभी रह रहे अल-कायदा के सदस्यों के प्रति ईरानी प्रशासन की जो नीति है, वह भी चिंता बढ़ाने वाली है । अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे 2007 में ईरान सरकार में अल-कायदा के गिरफ्तार सदस्यों को दंडित करने के प्रति अनिच्छा दिखी । उसने हिरासत में रखे गए संगठन के वरिष्ठ सदस्यों की सार्वजनिक रूप से पहचान बताने से इन्कार कर दिया है । ईरान से हिरासत में रखे गए अल-कायदा सदस्यों को उनके मूल देशों या पूछताछ व अदालती कार्रवाई वाले तीसरे देश में भेजने का कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन ईरान ने इसका लगातार विरोध किया है । रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अफगानिस्तान में तालिबान के पतन के बाद अल-कायदा के जो सदस्य ईरान भाग गए, वह उनकी गतिविधियों पर काबू रखने में भी लागातार असफल रहा है ।
ईरान और सीरिया के साथ-साथ क्यूबा, उत्तर कोरिया और सूडान की सरकारों को भी आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला करार दिया गया है । पैसा, हथियार और बचने के सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने के साथ-साथ इनमें से कुछ देशों के पास मानव संहार के हथियारों को बनाने की क्षमता भी है । इन हथियारों के अंततः आतंकवादियों के हाथों में जाने का खतरा है । अमेरिका और उसके अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों के सामने आज जो पहले से अधिक बड़ी सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हैं, उनमें एक यह संभावना है कि आतंकवादी व्यापक नरसंहार के हथियारों को प्राप्त कर सकते हैं और उनका उपयोग कर सकते हैं । रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका इस बात पर अड़ा हुआ है कि ये देश आतंकवादी संगठनों को प्रोत्साहन देना बंद करें ।