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| President Bush addresses the Knesset in Jerusalem, 15 May 2008 |
यहूदी राष्ट्र की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर इस्राइल की यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई एक ऐसी चुनौती है, जो 21वीं सदी का भविष्य तय करेगा । उन्होंने कहा
“यह अलग-अलग दृष्टिकोणों के बीच लड़ाई है । यह विचारधारा की एक बड़ी लड़ाई है । एक तरफ वह लोग हैं, जो तर्क एवं सत्य की ताकत के साथ न्याय एवं सम्मान के आदर्शों की रक्षा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ वह लोग हैं, जो हत्या, आतंक और झूठ के जरिये निष्ठुरता एवं नियंत्रण के संकुचित दृष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं ।”
उन्होंने कहा- हत्यारे यह दावा कर रहे हैं कि वह इस्लाम धर्म का पालन करने वाले हैं, लेकिन वे मजहबी लोग कतई नहीं हैं । उन्होंने कहा
“वे अपने सामने किसी भी खुदा को नहीं मानते । अमेरिकी एवं इस्राइली सहित तमाम लोगों की आजादी के बचाव में आगे आने वालों से उनको सख्त नफ़रत है ।”
श्री बुश ने कहा- यही कारण है कि फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन, हमास की स्थापना ही इस्राइल को समूल नष्ट करने की भावना के साथ की गई थी । यही कारण है कि ईरान-समर्थित लेबनानी आतंकवादी संगठन, हिज़्बुल्ला इस्राइल का अंत हो, अमेरिका का अंत हो, जैसे नारे बुलंद करता है ।
“यही कारण है कि ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद मध्य-पूर्व को मध्य युग में ले जाने के सपने देखते हैं और इस्राइल को दुनिया के नक्शे से मिटाने का ऐलान करते हैं ।”
उन्होंने कहा- अमेरिका आतंकवादी गिरोहों को छिन्न-भिन्न करने की इस्राइल की मुहिम में उसके साथ है । वह ईरान के परमाणु हथियार बनाने की मंशा के सख्त खिलाफ है । उन्होंने कहा-
“आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले दुनिया के सबसे अग्रिम देश को दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार प्राप्त करने देना भविष्य की पीढ़ियों के साथ एक ऐसा धोखा होगा, जिसे माफ नहीं किया जा सकता । शांति की खातिर दुनिया को किसी भी मूल्य पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने देने से रोकना होगा ।”
राष्ट्रपति बुश ने कहा- अंततः आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को उग्रवादियों की विचारधारा के विकल्प के रूप में न्याय, सहिष्णुता, आजादी और आशा का एक विकल्प देना होगा । जो नेता अपनी जनता के प्रति उत्तरदायी हैं, वे कभी भी अंतहीन टकराव और हिंसा के रास्ते पर नहीं चलेंगे । हमें निरंकुशता एवं निराशा के पुराने रास्तों से हटने की दिशा में कार्यरत सुधारवादियों का साथ देना होगा । हमें वैसे लाखों आम लोगों की आवाज बननी होगी, जो एक स्वतंत्र समाज में बेहतर जीवन की कल्पना करते हैं ।