बलात्कार को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल करने
का खतरा चिंताजनक रूप से बढ़ता जा रहा है, जिसे 19 जून को राष्ट्र संघ सुरक्षा
परिषद में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रस्तुत किया गया
। राष्ट्र संघ महासचिव बान की-मून और 60 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने
अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस के नेतृत्व में इस बैठक में भाग लिया, जो
यौन हिंसा को सुरक्षा मुद्दे की तरह अमेरिका द्वारा लिखित प्रस्ताव को पारित करने
के साथ सम्पन्न हुई ।
अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत यह युद्ध अपराध है, पर
सशस्त्र संघर्षों के दौरान हजारों महिलाओं और लड़कियों से बलात्कार किया गया है ।
यौन हिंसा में अक्सर सामूहिक बलात्कार, अंग भंग या जबरन यौन गुलामी शामिल होती है
और कुछ मामलों में ये अत्याचार पीड़ित महिला के पति या बच्चों के सामने किये जाते
हैं ।
लाइबेरिया और रवांडा में गृह युद्धों के दौरान युद्ध
रणनीति की तरह और बोस्निया में जातीय शुद्धिकरण के तरीके के तौर पर नागरिकों को
निशाना बनाने के लिए यौन हिंसा का प्रयोग किया गया । सूडान और लोकतांत्रिक कांगो
गणराज्य में युद्ध के दौरान बलात्कार एक गंभीर समस्या बना हुआ है ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लाइबेरिया में किये गए
एक अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 91 प्रतिशत लोगों ने कहा कि देश में गृह
युद्ध के दौरान उन्हें दुर्व्यवहार या यौन हिंसा के एक या ज्यादा कृत्यों का शिकार
होना पड़ा । और मानवीय मामलों के लिए अवर महासचिव जॉन होम्स ने जानकारी दी है कि
लोकतांत्रिक कांगो गणराज्य के दक्षिण कीवू प्रांत में 2005 से यौन हिंसा के 32,000
से ज्यादा मामले दर्ज किये गए हैं ।
अमेरिका द्वारा पेश किये गए प्रस्ताव में सशस्त्र
संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से नागरिकों की रक्षा के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग
की गई है । इसमें परिषद से उन पर ज्यादा दबाव डालने के लिए कहा गया है, जो इस
अन्याय को प्रोत्साहन देते हैं और जिसमें यौन हिंसा के अपराधों को क्षमादान से
बाहर रखना शामिल है ।
अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि
सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने वर्षों से इस पर बहस की है कि यौन हिंसा को सुरक्षा
का मुद्दा माना जाए या नहीं । सुश्री राइस ने कहा कि आज विश्व ने इस लंबित प्रश्न
का जवाब जोरदार 'हां' में दिया है ।
हम इसकी पुष्टि करते हैं कि यौन हिंसा न केवल
महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को गहरे प्रभावित करती है, बल्कि उनके देशों की
आर्थिक और सामाजिक स्थिरता पर भी असर डालती है ।