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इस महीने बर्मा की लोकतंत्र-समर्थक नेता और नोबल
शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची ने एक और जन्मदिन नजरबंदी में मनाया । उन्हें
सबसे पहले बर्मा की सैन्य सरकार ने 1989 में गिरफ्तार किया था और उन्होंने बाद के
ज्यादातर वर्ष प्रशासन की हिरासत में बिताए हैं । एक लिखित बयान में अमेरिकी विदेश
मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि बर्मा के सैन्य शासकों ने आंग सान सू ची को उनकी
आजादी और मौलिक राजनीतिक एवं नागरिक अधिकारों से वंचित रखा है । सुश्री राइस ने कहा
कि यह निंदनीय स्थिति खत्म होनी चाहिए ।
सुश्री आंग सान सू ची ने अपना ज्यादातर वयस्क जीवन
बर्मा में लोकतांत्रिक परिवर्तन लाने के लिए समर्पित कर दिया है । अपने सबसे
प्रसिद्ध भाषणों में से एक में आंग सान सू ची ने कहा था, "यह सत्ता नहीं है, बल्कि डर है, जो भ्रष्ट करता है । सत्ता खोने का डर उन
लोगों को भ्रष्ट करता है, जिनके पास सत्ता है और बल प्रयोग का डर उन्हें भ्रष्ट
करता है, जो इसे झेलते हैं ।" 1988 में बर्मी सेना ने सैन्य क्रांति में सत्ता
हथिया ली थी । मई, 1990 में आंग सान सू ची की पार्टी, नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी को
संसदीय चुनावों में अभूतपूर्व विजय मिली थी । परंतु सेना ने परिणामों का सम्मान
करने से इन्कार कर दिया और इसके बजाय बहुत से राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेल में
डाल दिया । आज बर्मा में करीब 2,000 राजनीतिक कैदी हैं । राष्ट्र संघ की एक ताजा
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से ज्यादातर को शोचनीय स्थितियों में रखा जा रहा है ।
इस साल मई में बर्मी सैन्य सरकार ने संविधान के
प्रारूप पर अवैध जनमत संग्रह कराया था । यह जनमत संग्रह डर और प्रताड़ना के माहौल
में कराया गया था । प्रशासन ने जनमत संग्रह की आलोचना को अपराध करार दिया था तथा
बोलने, एकत्र होने और संगठन बनाने की स्वतंत्रता पर और प्रतिबंध लगा दिये थे ।
हाल ही में बर्मा की सैन्य सरकार ने उन मामूली कदमों
को भी वापस ले लिया, जो उसने उठाए थे- आंग सान सू ची से नियमित रूप से मिलने के
लिए अधिकारी नियुक्त करना और उन्हें बर्मा के नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी के
अपने सहयोगियों से मिलने की अनुमति देना । जनवरी से ऐसी कोई भी मुलाकात नहीं हुई
है । आंग सान सू ची को चिकित्सा सुविधाओं और कानूनी सलाह से भी वंचित रखा जा रहा
है ।
पिछले वर्ष सितंबर में हुए विशाल प्रदर्शनों जैसा
खतरा उठाने के बजाय बर्मी सरकार को अब कदम उठाना चाहिए तथा आंग सान सू ची समेत सभी
राजनीतिक कैदियों को रिहा कर देना चाहिए । इसके अतिरिक्त, सैन्य सरकार को लोकतंत्र
लाने के मामले में आंग सान सू ची तथा अन्य लोकतांत्रिक और जातीय अल्पसंख्यक नेताओं
के साथ वार्ता शुरू करनी चाहिए ।