वायस औफ़ अमेरिका  ▪ Hindi
हमें सुने, सब कुछ जानें

केवल आलेख
खोजने के लिए यहां क्लिक करें

राष्ट्र संघ ने नेपाल में बाल गुरिल्ला लड़ाकुओं की रिहाई की मांग की

27/08/2008

 

Two potential recruits relax after finishing the grueling 'doko' race - a 5km dash uphill carrying a 25kg basket, 6 Dec<br />2007
child soldiers
राष्ट्र संघ ने नेपाल के भूतपूर्व माओवादी विद्रोहियों से मांग की है कि वे उन सभी बाल सैनिकों को रिहा कर दें, जिन्हें राजशाही को उखाड़ फेंकने के लिए एक दशक तक चले आंदोलन के दौरान भर्ती किया गया था । ये भूतपूर्व विद्रोही अब नेपाल सरकार को चला रहे हैं । नई दिल्ली से अंजना पसरीचा की रिपोर्ट-

राष्ट्र संघ का कहना है कि करीब 3,000 बाल सैनिक अभी भी राष्ट्र संघ की निगरानी वाले नेपाल के शिविरों में रह रहे हैं । ये सभी माओवादी गुरिल्ला सेनाओं से ताल्लुक रखते हैं ।

इन नाबालिग लोगों को माओवादियों ने नेपाल की राजशाही के खिलाफ छेड़े गए गुरिल्ला संघर्ष के दौरान भर्ती किया था । 2006 में एक शांति समझौते के तहत 19,000 विद्रोही सैनिकों को अनेक शिविरों में बंद कर दिया गया था, जिनमें ये नाबालिग सैनिक भी शामिल हैं ।

इसके बाद देश में काफी बदलाव आया है । माओवादी सत्ता में हैं और उनके नेता प्रचंड नेपाल के प्रधानमंत्री   हैं । नेपाल में राष्ट्र संघ के मिशन के संचालक, मैकेरीना आगुइलर ने कहा है कि सरकार को 18 साल से कम उम्र वाले सभी लड़ाकुओं को औपचारिक रूप से रिहा कर देना चाहिए ।

उनका कहना है कि मुख्यधारा में फिर से शामिल होने के उनके अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी को इसका समर्थन करना चाहिए । सभी लोगों को इस बात की चिंता है कि जितना ये नाबालिग लोग अपने परिवारों और अपने समुदायों से अलग रहेंगे उतना ही मुख्यधारा में शामिल होने की प्रक्रिया कठिन होती जाएगी ।

माओवादियों ने उनकी रिहाई की मांग पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है । उन्होंने कहा है कि अभी उन्हें यह फैसला करना है कि उनका क्या किया जाए । कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता प्रकट की है कि कहीं इन युवा लोगों को राजनीतिक अभियानों में तो इस्तेमाल नहीं किया जाएगा ।

गौरी प्रधान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रवक्ता हैं । आयोग भी इन युवा लड़ाकुओं की रिहाई पर जोर दे रहा है । गौरी प्रधान को आशा है कि हाल में हुए राजनीतिक परिवर्तनों के बाद माओवादियों के सत्ता में आने के फलस्वरूप इन नाबालिग लड़ाकुओं की किस्मत भी बदलेगी ।

उनका कहना है कि यह मौका ही नहीं है, आज की चुनौती भी है । प्रधानमंत्री पर सरकार के मुखिया के होने के नाते इन नाबालिग लोगों को बचाने और वापस उन्हें अपने परिवारों में भेजने की जिम्मेदारी है ।

यह मसला अभी हल किया जाना है कि शिविरों में रहने वाले हज़ारों गुरिल्ला सैनिकों का क्या होगा । भूतपूर्व विद्रोही इन्हें सेना में भर्ती कराना चाहते हैं, लेकिन सेना ऐसे सैनिकों को भर्ती करने के मामले में हिचक रही है, जिनकी राजनीतिक रूप से दीक्षा हुई है ।

emailme.gif यह आलेख ई मेल करें
printerfriendly.gif प्रिंट करने के पहले यहां देखें

  सबसे महत्वपूर्ण
अमरीका के राष्ट्रपति जौर्ज बुश का एपेक शिखर बैठक में मुक्त मंङी अर्थव्यवथा पर ज़ोर

  अन्य रिपोर्टें
कई भारतीय कंपनियों ने अपनी विस्तार योजनाओं को स्थगित किया
इराक युद्ध ने आतंकवाद नहीं भड़काया- टोनी ब्लेयर
सोमाली डाकुओं के चंगुल से छूटा जहाज भारतीयों सहित मस्कट पहुंचा
पाकिस्तान भारत के खिलाफ पहले परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं करेगा- ज़रदारी
आतंकवादी रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं- गृह मंत्री 
मलेशिया में इस्लामी संस्था ने मुसलमानों के योगाभ्यास पर रोक लगाई
श्री ओबामा की २०११ तक पच्चीस लाख पद स्थापित करने की योजना
पाकिस्तान में हुए एक हमले में भगोड़ा ब्रिटिश उग्रवादी मारा गया
कश्मीर में प्रतिवाद प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में दो लोगों की म्रत्यु
अफगानिस्तान में १४ उग्रवादियों की मौत
तिब्बती निर्वासितों द्वारा चीन के साथ और वार्ताएं न करने के लिए मतदान
अमरीकी खुफिया रिपोर्ट : विश्व बहुध्रुवीय वैश्विक समुदाय की ओर अग्रसर
राष्ट्रसंघ महा सचिव द्वारा बांग्लादेश चुनावों के लिए विशेष दल गठित . 
अल-कायदा वैश्विक वित्तीय संकट से लाभ उठाने की कोशिश में 
प्रधानमंत्री ने कहा, वैश्विक आर्थिक संकट से लड़ने के लिए सभी नीतिगत औजार प्रयोग किये जाएंगे 
बैंक राष्ट्रीयकरण ने भारत को मंदी की मार झेलने में मदद दी- सोनिया गांधी 
वस्त्र उद्योग - 5 लाख कर्मचारियों के बेरोजगार होने का खतरा