(वी.ओ.ए न्यूज़)
परमाणु समझौते पर अमेरिकी खुलासे के बाद भारतीय
राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर देश को भारत-अमेरिकी परमाणु सौदे के बारे में गुमराह
करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा है ।
इस सिलसिले में आज अमेरिकी राजदूत डेविड सी मलफर्ड
प्रधानमंत्री के कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के नारायणन और अन्य
अधिकारियों से मिले । समझा जाता है कि श्री नारायणन और राजदूत मलफर्ड ने इस मुद्दे
पर बातचीत की, जिसमें परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोडकर भी शामिल थे ।
समझा जाता है कि श्री मलफर्ड ने उन्हें बताया कि जिस
पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसका विवरण पहले ही भारत को बताया जा चुका था ।
दरअसल कल ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक पत्र का
खुलासा किया गया था, जिसमें अमेरिकी सांसदों को बताया गया था कि अगर भारत परमाणु
परीक्षण करेगा तो उसे ईंधन की आपूर्ति और अन्य परमाणु सहयोग बंद कर दिया जाएगा ।
इससे भारत में विवाद भड़क उठा है और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी तथा वामपंथी दलों
ने कांग्रेस-नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिये हैं ।
गौरतलब है कि यह खुलासा 45 देशों के न्यूक्लियर
सप्लायर्स ग्रुप की दो-दिवसीय बैठक शुरू होने से ठीक पहले किया गया है, जिसमें
भारत को रियायत देने पर विचार किया जाएगा, जिससे भारत अन्य देशों के साथ परमाणु
व्यापार कर सकेगा, हालांकि उसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं ।
आज नई दिल्ली में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के
महासचिव प्रकाश करात ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भारत-अमेरिकी परमाणु सौदे के
बारे में लोगों और संसद से झूठ बोलने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की
उन्होंने कहा कि जाहिर है कि भारत सरकार को अच्छी
तरह मालुम था कि ईंधन आपूर्ति के आश्वासन 123 समझौते को खारिज किये जाने पर लागू
नहीं होंगे और उन्होंने जान-बूझकर देश को गुमराह किया है ।
भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार से संसद का विशेष
सत्र बुलाने की मांग की है । इस समझौते का पहले से ही विरोध कर रही वामपंथी
पार्टियां, भाजपा, बहुजन समाज पार्टी, जनता दल-एस तथा अन्य पार्टियां अगले कुछ
दिनों में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिलेंगी और संसद के मानसून सत्र को तुरंत
बुलाने की मांग करेंगी ।
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Manmohan Singh
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परंतु कांग्रेस ने आज विपक्ष की इन मांगों को खारिज
कर दिया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस्तीफा दें और तुरंत संसद की बैठक बुलाई जाए
। कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने इन मांगों को ठुकराते हुए कहा कि
प्रधानमंत्री और सरकार ने शुरू से ही भारत-अमेरिकी परमाणु समझौते से संबंधित
घटनाओं के बारे में संसद और देश को जानकारी दी है । उन्होंने भाजपा और वाम दलों के
इस आरोप को आपत्तिजनक और बेबुनियाद बताया कि प्रधानमंत्री ने देश को गुमराह किया
है ।
उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी
भारत-अमेरिका परमाणु सौदे की वकालत करते हुए कहा है कि देश के विकास के लिए परमाणु
ऊर्जा बहुत जरूरी है । आज पश्चिम तमिलनाडु के इरोड शहर में एक रैली को संबोधित
करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा देश बड़ा है और 100 करोड़ से ज्यादा आबादी है ।
हमें ऊर्जा की जरूरत है । हम मानते हैं कि परमाणु ऊर्जा बहुत आवश्यक है । जितनी
अधिक ऊर्जा होगी, उतनी ही तेज गति से विकास होगा ।