पोप बेनेडिक्ट XVI ने आज भारत में ईसाई-विरोधी हिंसा की भर्त्सना करते हुए इसमें शामिल लोगों को ऐसी गतिविधियों से बाज आने और प्यार की संस्कृति के निर्माण में साथ मिलकर काम करने को कहा ।
एक विशेष समारोह में भारत के केरल राज्य में जन्मी सिस्टर अल्फोंजा को और अन्य तीन को संत की उपाधि दिये जाने के बाद अपने अंतिम भाषण में पोप ने कहा कि मैं हिंसा में शामिल लोगों से ऐसी गतिविधियां छोड़ कर प्यार की संस्कृति के निर्माण में अपने भाइयों और बहनों के साथ मिलकर काम करने का अनुरोध करता हूं ।
उड़ीसा और कर्नाटक में ईसाइयों और उनके गिरिजाघरों पर हमले का जिक्र करते हुए अंग्रेजी में दिये अपने भाषण में उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब भारत के विश्वासी ईसाई अपनी धरती की पहली बेटी को इस उपाधि से नवाजे जाते वक्त ईश्वर का धन्यवाद कर रहे हैं, इस मुश्किल वक्त में मैं उन्हें अपनी प्रार्थनाओं के जरिये आश्वस्त कर रहा हूं ।
भारत तथा अन्य जगहों से सैंट पीटर्स बेसीलिका पहुंचे हजारों ईसाइयों को संबोधित करते हुए पोप ने कहा कि सिस्टर अल्फोंजा का धैर्य, साहस और तटस्थ से भरा महान व्यक्तित्व दुख की घड़ी में यह याद दिलाता है कि ईश्वर हमेशा हमें इन मुश्किलों से बाहर निकलने के लिए जरूरी शक्ति प्रदान करता है ।
पोप ने इससे पहले अगस्त महीने में उड़ीसा में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की निंदा की थी और भारतीय धार्मिक और नागरिक संगठनों का विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व स्थापित करने और सौहार्द्रता बहाल करने के लिए साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया था ।